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नारी शक्ति पर शायरी | नारी के सम्मान में शायरी

Nari Shakti per shayari

नारी के सम्मान में दो शब्द | नारी सशक्तिकरण पर शायरी |Women shayari | Nari Shakti per shayari


दिन की रौशनी ख्वाबों को बनाने में गुजर गई,
रात की नींद बच्चे को सुलाने में गुजर गई,
जिस घर में मेरे नाम की तख्ती भी नहीं,
सारी उम्र उस घर को सजाने में, ...


दुनिया की पहचान है औरत,
हर घर की जान है औरत,
बेटी, बहन, माँ और पत्नी बनकर,
घर घर की शान है औरत।, ..


कुछ लोग कहते है की नारी का कोई घर नहीं होता,
लेकिन मेरा यकीन है के औरत के बिना कोई घर घर नहीं होता।,


जिसने बस त्याग ही त्याग किए,
जो बस दूसरों के लिए जिए,
फिर क्यों उसको धिक्कार दो,
उसे जीने का अधिकार दो।, ..


हजारों फूल चाहिए एक माला बनाने के लिए,
हजारों दीपक चाहिए एक आरती सजाने के लिए,
हजारों बूंद चाहिए समुद्र बनाने के लिए,
पर एक स्त्री अकेली है काफी है घर, ..




मनुष्यों को बेहतर ये समझना चाहिए कि, महिलाओं की ताकत के आधार पर ही जिंदगी की लड़ाई जीतने की सम्भावनाएं होती है ।



महिलाएं इस समाज की वास्तविक आर्किटेक्ट हैं।


लड़कियों को कमज़ोर और बोझ मानने वाले लोगों, भारत में ऐसी हज़ारों लडकियाँ हैं जिनपे भारत के हर नागरिक को गर्व है ।


वह जन्म देती है, वह मौत से बचाती है, वह आगे बढ़ाती है, वह औरत कहलाती है ।


शक्ति महिलाओं की प्रतीक है । प्रकृति की बेहतरीन और सबसे सुन्दर रचना है । इनके बिना कोई निर्माण संभव नहीं है ।


स्त्री अपने कंधो पर सब कुछ ले जाती है, और मुस्कुराते हुए अंत में गंतव्य तक पहुँचाती भी है ।
हर एक व्यक्ति के अच्छाई और तरक्की के पीछे एक औरत का हाथ है ।



औरत ने जनम दिया मर्दों को मर्दों ने उसे बाज़ार दिया
जब जी चाहा मसला कुचला जब जी चाहा धुत्कार दिया



बेटियाँ बाप की आँखों में छुपे ख़्वाब को पहचानती हैं

और कोई दूसरा इस ख़्वाब को पढ़ ले तो बुरा मानती हैं


बताऊँ क्या तुझे ऐ हम-नशीं किस से मोहब्बत है
मैं जिस दुनिया में रहता हूँ वो इस दुनिया की औरत है



एक औरत से वफ़ा करने का ये तोहफ़ा मिला
जाने कितनी औरतों की बद-दुआएँ साथ हैं


शहर का तब्दील होना शाद रहना और उदास
रौनक़ें जितनी यहाँ हैं औरतों के दम से हैं


एक के घर की ख़िदमत की और एक के दिल से मोहब्बत की
दोनों फ़र्ज़ निभा कर उस ने सारी उम्र इबादत की ज़ेहरा निगाह


औरत के ख़ुदा दो हैं हक़ीक़ी ओ मजाज़ी
पर उस के लिए कोई भी अच्छा नहीं होता


तलाक़ दे तो रहे हो इताब-ओ-क़हर के साथ
मिरा शबाब भी लौटा दो मेरी महर के साथ


कौन बदन से आगे देखे औरत को
सब की आँखें गिरवी हैं इस नगरी में




नारी तू जब रूद्र रूप धर,
दुष्टों को लल्लकारेगी,
दुष्टों को लल्लकारेगी।
पाप पहर अविनाश करेगी,
बिगड़ी दशा सुधारेगी
बिगड़ी दशा सुधारेगी।
अब तो नारी वीर बन....


*गार्गी,अहिल्य,मैत्रैयी सब,
भारत मे ही जन्म लीं
भारत मे ही जन्म लीं।
जिनकी गाथा राष्ट्र है गाता,
ऐंसी शक्ति सुयोग्य हुईं
ऐंसी शक्ति सुयोग्य हुईं।
अब तो नारी वीर बन.......


अब तो नारी वीर बन,शक्ति का प्रतीक बन
वीणा की झंकार बन,लक्ष्मी की तलवार बन
अब तो नारी वीर बन ।।




नारी शक्ति है, सम्मान है
नारी गौरव है, अभिमान है
नारी ने ही ये रचा विधान है
हमारा शत-शत प्रणाम है.


क्यों कहती है दुनिया कि नारी कमजोर हैं,
आज भी नारी के हाथों में घर चलाने की डोर हैं.


अपमान न करना नारियों का,
इनके बल पर जग चलता हैं,
पुरूष जन्म लेकर तो
इन्हीं के गोद में पलता हैं.


लोग कहते हैं तेरा क्या अस्तित्व नारी,
दुःखों को दूर कर, खुशियों को बिखेरे नारी.


अपने हौसले से तकदीर को बदल दूँ,
सुन ले दुनिया, हाँ मैं औरत हूँ.




औरत हूँ मगर सूरत-ए-कोहसार खड़ी हूँ
एक सच के तहफ़्फ़ुज़ के लिए सबसे लड़ी हूँ




दुनिया की पहचान है,औरत
हर घर की जान है औरत
बेटी, बहन, माँ और पत्नी बनकर
घर घर की शान है औरत




औरत को जो समझता था मर्दों का खिलौना
उस शख़्स को दामाद भी वैसा ही मिला है


नारी तुम प्रेम हो, आस्था हो, विश्वास हो
टूटी हुई उम्मीदों की एकमात्र आस हो


क्यों कहती है दुनिया कि नारी कमजोर हैं
आज भी नारी के हाथों में घर चलाने की डोर हैं




अपमान न करना नारियों का
इनके बल पर जग चलता हैं
पुरूष जन्म लेकर तो
इन्हीं के गोद में पलता हैं


नारी सम्मान शायरी



दुनिया की पहचान है,औरत
हर घर की जान है औरत
बेटी, बहन, माँ और पत्नी बनकर
घर घर की शान है औरत




मुस्कुराकर,दर्द भूलकर
रिस्तो में बंद थी दुनिया सारी
हर पग को रोशन करने वाली
वो शक्ति है एक नारी




दुनिया की पहचान है,औरत
दुनिया पर एहसान है औरत
हर घर की जान है औरत
बेटी. माँ ,बहन,भाभी,बनकर
घर घर की शान है औरत
न समझो इसको तुम कमजोर कभी
ये है रिश्तो की डोर
मर्याद और सम्मान है औरत




हज़ारो फूल चाहिए एक माला बनाने के लिए
हज़ारो दीपक चाहिए एक आरती सजाने के लिए
Hajaro बून्द चाहिए समुद्र बनाने के लिए
पर एक “स्त्री” अकेली ही काफी है
घर को स्वर्ग बनाने के लिए




वो शाख है न फूल, गर तितलियां न हों, वो घर भी कोई घर है, जहां बेटियां न हों ….

– दिलों में बस जाए वो मोहब्बत हूं, कभी बहन तो कभी ममता की मूरत हूं।

– एक औरत कभी उधार नहीं रखती, मोहब्बत, इज्जत, खुशी, नफरता और वफा सब दुगना करके लौटाती है।

– मुस्कुराकर, दर्द भुलाकर, रिश्तों में बंद थी दुनिया सारी, हर पग को रोशन करने वाली वो शक्ति है एक नारी।

– बेटी, बहू कभी मां बनकर ,सबके ही सुख-दुख को सहकर, अपने सब फर्ज निभाती है, तभी तो वो नारी कहलाती है।

– मुंह तोड़ दुश्मनों को ये देती है जवाब, ये जिन्दगी के जंग की हुंकार है औरत।

– अपना वजूद भुलाकर हर किरदार निभाती है, ये वो देवी है जो घर को स्वर्ग बनाती है।

– कम नहीं ये किसी से साबित कर दिखलाएंगी, खोल दो बन्धन ये लड़कियां हर मंजिल पा जाएंगी।

– अभी रौशन हुआ जाता है रास्ता, वो देखो एक औरत आ रही है।

– औरत मोहताज नहीं किसी गुलाब की, वो खुद बाग़बान है इस कायनात की..

– जहां भी मिले दर झुकने को, बंदगी के फूल चढ़ा देती है, कभी गौर करके देखना दुनिया वालों, दस साल की बिटिया बाप का हौंसला बढ़ा देती है।